क्रिप्टोकरेंसी क्या है-What Is Cryptocurrency in Hindi

क्रिप्टोकरेंसी क्या है-What Is Cryptocurrency in Hindi

Cryptocurrency Kya Hai-Cryptocurrency in Hindi
What Is Cryptocurrency in Hindi
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जानिये क्या है क्रिप्टोकरेन्सी-What is Cryptocurrency in Hindi
जैसा की आप पढ़ रहे हैं ‘क्रिप्टोकरेंसी’ यह मूलतः दो शब्दों से मिलकर बना है Crypto + Currency । अब यहाँ Crypto का अर्थ है सीक्रेट और Currency है किसी वस्तु को खरीदने का माध्यम।

हम अपने दैनिक जीवन में प्रतिदिन कागज़ के नोट एवं सिक्कों का लेन-देन करते रहते हैं। ठीक उसी प्रकार क्रिप्टोकरेन्सी का लेन-देन भी ऑनलाइन डिजिटल माध्यम से किया जाता है। जिस प्रकार रुपया-पैसा एक हाँथ से दूसरे हाँथ और फिर तीसरे हाँथ घूमता फिरता रहता है ठीक वैसे ही Cryptocurrency भी एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर और फिर तीसरे कंप्यूटर के डेटाबेस से गुजरती रहती है जिसे कंप्यूटर की भाषा में पियर टू पियर नेटवर्क के नाम से जाना जाता है। क्रिप्टोकरेन्सी के इस घूमने की प्रक्रिया Blockchain नामक टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित होती है।

क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) एक बाइनरी डाटा (binary data) है, जिसका उपयोग लेन-देन के लिए किया जाता है। इसे मौज़ूदा समय की करेंसी जैसे नोट एवं सिक्के के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। यह हमारे द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले कागज़ के नोट और सिक्के की तरह फिज़िकल फॉर्म में उपलब्ध ना होकर ‘कम्प्यूटरीकृत डेटाबेस’ के रूप में मौजूद होती है। इसीलिए इसे डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक मनी भी कहा जाता है।


जब इसकी शुरुआत हुई थी तब कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन बाद में क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई देशों ने इसे कानूनी मान्यता प्रदान कर दी। मौजूदा समय में आप अब क्रिप्टोकरेंसी (digital money) से सामान भी खरीद सकते हैं, निवेश कर सकते हैं या फिर इनसे ऑनलाइन ट्रेड भी कर सकते हैं।

क्रिप्टोकरेंसी (electronic money) किसी सरकार या किसी अन्य सेंट्रल अथॉरिटी (central authority) के द्वारा संचालित नहीं होती है। इसे डिसेंट्रलाइज्ड सिस्टम के द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इसमें हर लेन-देन का वेरिफिकेशन किया जाता है और उसका रिकॉर्ड भी रखा जाता है। इसे क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग कहते हैं और इसकी निगरानी करने वालों को माइनर्स कहा जाता है। हर लेन-देन के हिसाब को ब्लॉकचेन (blockchain) में दर्ज किया जाता है जिससे इसकी नकल करना या इसका गलत प्रयोग करना लगभग नामुमकिन है।

ब्लॉकचेन  टेक्नोलॉजी क्या है-What is Blockchain Technology
ब्लॉकचेन की टेक्नोलॉजी को ज्यादा गहराई में ना समझाते हुए मैं बस इतना ही कहूंगा की Cryptocurrency की होने वाली अनगिनत transaction को छोटे छोटे ब्लॉक में विभाजित कर दिया जाता है। जैसे ही एक ब्लॉक का ट्रांज़ैक्शन भर जाता है फिर फिर दूसरा ब्लॉक बन जाता है। इस प्रकार ट्रांज़ैक्शन के ब्लॉक बनते जाते हैं और प्रत्येक ब्लॉक पिछले ब्लॉक से जुड़ता चला जाता है; इस प्रकार ट्रांज़ैक्शन ब्लॉक से निर्मित चेन क्रिएट होता चला जाता है।
सार्वजनिक खाता बही-Public Ledger
बही खाता, यानि कि वो रजिस्टर जिसमें दो व्यक्ति के बीच किसी भी तरह का लेन-देन अंकित हो। अकाउंटेंट, बैंक या फिर कोई दुकान; लगभग सभी व्यापार वाली जगहों पर बही खाता रजिस्टर मौजूद होता है।

ऑनलाइन पब्लिक लेजर भी एक तरह का खाता बही है जो फिजिकल उपलब्ध ना होकर कंप्यूटर डेटाबेस में होता है। cryptocurrency की दुनियां में भी पब्लिक लेजर का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें किस व्यक्ति ने कितना बेचा और किस व्यक्ति ने कितना खरीदा का लेखा-जोखा मौजूद होता है। यह डिजिटल लेजर होता है जो केवल किसी एक कंप्यूटर के डेटाबेस से प्रोसेस ना होकर अनेकों कंप्यूटर के डेटाबेस से प्रोसेस होता है। अर्थात जब आप cryptocurrency को बेचते हैं तो वह डेटा किसी एक कंप्यूटर में ना रहकर लाखों कंप्यूटर में चला जाता है और ठीक उसी प्रकार जब आप कोई cryptocurrency खरीदते हैं तो उसका रिकॉर्ड भी एक कंप्यूटर में रह कर लाखों कंप्यूटर में सुरक्षित कर दिया जाता है। इस प्रकार धीरे धीरे एक बहुत विशाल digital ledger बनकर तैयार हो जाता है।


क्या होता है ब्लॉकचेन-What is Blockchain
ब्लॉकचेन कुछ विशेष नहीं बल्कि एक कंप्यूटर टेक्नोलॉजी है जिसके माध्यम से ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन को छोटे छोटे ब्लॉक में विभाजित कर उसे चेन के रूप में पिरोकर प्रोसेस किया जाता है। इस प्रकार आपके या मेरे द्वारा किया जाने वाला प्रत्येक ट्रांज़ैक्शन चेन से जुड़कर सुरक्षित रहता है।


यह सारा खेल कंप्यूटर एवं नेटवर्क के माध्यम से खेला जाता है अतः क्रिप्टोकरेंसी की सुरक्षा का दावा 100 प्रतिशत डंके की चोट पर नहीं किया जा सकता। परन्तु इस पूरे खेल को 100 प्रतिशत सुरक्षित माना जा सकता है जिसकी बड़ी वजह है इसकी टेक्नोलॉजी एवं सीक्रेट कोड और लाखों कंप्यूटर व डेटाबेस का चेन।

क्रिप्टोकरेन्सी का क्रय-विक्रय सॉफ्टवेयर एवं टेक्नोलॉजी के माध्यम से किया जाता है यह किसी व्यक्ति के द्वारा नहीं किया जाता। न कोई किसी के ट्रांज़ैक्शन को एडिट कर सकता है ना ही डिलीट कर सकता है। यदि किसी ने कैसे भी कोई जुगत लगाकर ट्रांज़ैक्शन में बदलाव करने का प्रयास भी किया तो वह पकड़ा जाता है।

जब भी आप Cryptocurrency खरीदते हैं तो आपका Digital Public Ledger वेरीफाई होता है ठीक वैसे ही जब आप Cryptocurrency बेचते हैं तब भी आपका डिजिटल पब्लिक लेजर वेरीफाई होता है और वेरिफिकेशन की यह प्रक्रिया किसी एक कंप्यूटर से ना होके अनेकों कंप्यूटर नेटवर्क द्वारा होती है और आपके द्वारा किये गए सभी transactions के block chain को खंगाला जाता है। यह प्रक्रिया बेहद ही जटिल कंप्यूटर अल्गोरिथम द्वारा पूरी की जाती है अतः क्रिप्टोकरेन्सी के Buy एवं Sell में धोखाधड़ी नामुमकिन बन जाती है।

हमारी गोपनीयता-Data Privacy
हमारे द्वारा दिया जाने वाला डेटा भी पूरी तरह गोपनीय होता है जिसे Cryptography से मेन्टेन किया जाता है। क्रिप्टोग्राफ़ी एक प्रकार का एन्क्रिप्टेड कोड होता है जिसका इस्तेमाल कर हमारी जानकारियों को गोपनीय रखा जाता है। मेरा नाम Ravi Prakash Sharma है किन्तु क्रिप्टोग्राफ़ी की सहायता से मेरा नाम एक कोड द्वारा संदर्भित किया जायेगा जिसे कोई यूजर देख भी ले तो समझ नहीं सकता।


क्यों क्रिप्टोकरेंसी को प्राइवेट करेंसी कहा जाता है-Why is Cryptocurrency called a Private Currency
साधारणतः हमारा रुपया सरकारी की नजर में होता है, बैंक कर्मचारियों की नजर में होता है, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर में होता है, हमारे सगे संबंधियों की नजर में होता है। अतः फिजिकल मनी हमारे पास कितनी है यह हर कोई जान लेता है, इतना ही नहीं हमारी गोपनीयता भी बरकरार नहीं रहती।

किन्तु क्रिप्टो एक सीक्रेट मनी है, यानि यह पूरी तरह प्राइवेट मनी है जिसके बारे में सिवाय हमारे कोई नहीं जानता। Cryptocurrency का कण्ट्रोल हमारे हाथ में होता है और सामान्य रुपयों में होने वाली गिरावट का भी इसपर कोई असर नहीं होता।

क्रिप्टोकरेंसी की वैल्यू का घटना एवं बढ़ना

यह सवाल बहुत लोग पूछते हैं की जब क्रिप्टोकरेंसी सरकार के कंट्रोल में नहीं है और इसे करोड़ों लोग बेच खरीद रहे हैं तो उसका भाव कैसे तय होता है ? सवाल तो बेहद ही उम्दा है।

बात ये है की, कुल कितने क्रिप्टोकॉइन प्रोडूस होंगे यह पहले से ही फिक्स कर दिया जाता है। तो सर्वप्रथम आप यह जान लें की क्रिप्टोकॉइन कितने प्रोडूस किये जायेंगे इसे पहले से ही निर्धारित कर दिया जाता है। कॉइन प्रोडक्शन फिक्स कर दिए जाने से यह बेहद लिमिटेड हो जाता है अतः इसकी संख्या सीमित हो जाती है।

चूँकि अब संख्या सीमित है इसलिए क्रिप्टोकरेंसी में उछाल एवं गिरावट पब्लिक डिमांड पर निर्भर करती है। यदि Crypto Coin में ज्यादा लोग निवेश कर रहे हैं तब इसकी वैल्यू बढ़ जाती है और जब Crypto Coin में निवेश कम होने लगता है या ज्यादा लोग बेचकर निकलने लगते हैं तब इसकी वैल्यू गिर जाती है। यह काफी कुछ शेयर मार्केट जैसा लग रहा होगा पर घटने एवं बढ़ने का सारा खेल यही है।

अगर हम बिटकॉइन की बात करें तो इसकी सप्लाई 21 मिलियन तक लिमिट है। सन 2010 में बिटकॉइन का प्राइस मात्र 20 रुपया था मगर कुछ साल बाद इसका प्राइस 45 लाख पर जा पहुंचा और आज इसका प्राइस है 30 से 35 लाख के बीच। आप अंदाजा लगा सकते हैं की कहाँ 20 रुपया और कहाँ 30 लाख रूपया। इस चढ़ाव को देखकर यह कहा जा सकता है की क्रिप्टोकरेंसी में बिटकॉइन खरीदने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है।

क्रिप्टोकरेंसी के प्राइस बढ़ने एवं घटने में न्यूज़, कंपनी और इन्वेस्टर का भी प्रभाव होता है जो ठीक शेयर मार्केट जैसा ही है। मगर सबसे बड़ा प्रभाव पब्लिक डिमांड का ही है। जैसे जैसे बिटकॉइन को हर जगह एक्सेप्ट किया जाने लगा है और इस डिजिटल करेंसी का उपयोग वस्तुओं को खरीदने में भी किया जाने लगा है वैसे वैसे बिटकॉइन का भाव सातवें आसमान के पार जाता नजर आ रहा है। किन्तु एक नेगेटिव न्यूज़ इसको सातवें आसमान से नीचे भी पटक सकता है।

क्या क्रिप्टो करेंसी भारत में लीगल है ?

इसका उत्तर है …हाँ,
किन्तु क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना, इसे होल्ड करना और इसमें ट्रेड करना लीगल है लेकिन भारत में इसे अभी legal tender of money नहीं माना जाता क्योंकि इसे आप पैसों की जगह इस्तेमाल नहीं कर सकते। यदि आप भारत में आप नोट एवं सिक्कों से क्रिप्टो कॉइन खरीदना चाहेंगे तो यह संभव नहीं है।



क्रिप्टोकरेन्सी को कैसे करें निवेश ?

जहां क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-फरोख़्त और ट्रेडिंग होती है उसे ‘कॉइन मार्केट या क्रिप्टोमार्केट’ के नाम से जाना जाता है। यहां पर क्रेडिट कार्ड और डिजिटल पेमेंट भी स्वीकार किया जाता है और यहां पर आप कागज़ी मुद्रा को क्रिप्टोकरेंसी में और क्रिप्टोकरेंसी को कागज़ी मुद्रा में बदल सकते हैं।

कुछ प्रमुख क्रिप्टो मार्केट वेबसाइट इस प्रकार हैं –
  • Binance
  • Coinbase
  • Crypto.com
  • Coincheck और
  • Bitfinex इत्यादि।
इसके अलावा भी कई क्रिप्टो मार्केट वेबसाइट हैं, जिन्हें आप आराम से गूगल में सर्च करके देख सकते हैं। वहीं अगर भारत की बात करें तो WazirX, Coinswitch, CoinDCX और Unocoin अधिक लोकप्रिय हैं, जिनके जरिए आप बिटकॉइन (Bitcoin), इथीरियम (Ethereum) जैसे कई क्रिप्टो कॉइन खरीद सकते हैं और भारतीय रुपये में पेमेंट कर सकते हैं। इसके लिए आपको सम्बंधित वेबसाइट पर जाकर लॉगिन करना होगा जहाँ आपसे कुछ डॉक्यूमेंट मांगे जाते हैं, उदाहरण के तौर पर – पहचान प्रमाण पत्र, पैन कार्ड इत्यादि। इस प्रक्रिया को पूरा करके आप आगे का लेन-देन कर सकते हैं।

क्रिप्टो करेंसी का इतिहास और वर्तमान

अगर क्रिप्टोकरेंसी के इतिहास की बात करें तो सन् 1983 में अमेरिकी क्रिप्टोग्राफर डेविड चाउम (David Chaum) ने इलेक्ट्रॉनिक मनी की कलपना की थी, जिसे ई-कैश (E-Cash) कहा जाता है। उसके बाद साल 1995 में उन्होंने इसे डिजीकैश (Digi Cash) से लागू किया था। जिसके बाद लोगों का और सरकारों का रुझान क्रिप्टोकरेंसी की तरफ बढ़ने लगा और समय के साथ-साथ कई नए क्रिप्टो कॉइन दुनियां के सामने आते गये।

साल 2009 में दुनियां का पहला विकेन्द्रीकृत क्रिप्टो करेंसी ‘बिटकॉइन’ सामने आया जिसे सतोशी नाकामोटो (pseudonymous developer) ने बनाया था। इसके अगले ही कुछ सालों में नाम कॉइन, लाइट कॉइन और पीरकॉइन जैसे कई और क्रिप्टो कॉइन सामने आने लगे, जिससे साफ हो गया था कि अब यही भविष्य है और फिर डिजिटल मनी की दौड़ चालू हो गई।

जून 2021 में अल सल्वाडोर बिटकॉइन को लीगल टेंडर (legal tender) के रूप में स्वीकार करने वाला विश्व का पहला देश बन गया।

आज के समय में दुनियां भर में एक हज़ार से अधिक तरह के क्रिप्टो करेंसी मौजूद हैं, हालांकि जब ये लांच हुए थे तब इनकी कीमत लगभग न के बराबर ही थी। वहीं अगले ही कुछ सालों में इनकी कीमत हज़ार डॉलर के करीब भी पहुंच गई। बिटकॉइन जब शुरु हुआ था तब उसकी कीमत एक डॉलर थी जो आज बढ़कर 45000 यूएस डॉलर के करीब पहुंच चुकी है, जो यह दर्शाता है कि क्रिप्टोकरेंसी के मार्केट में कितनी संभावनाएं हैं।

जिस समय बिटकॉइन लांच हुआ था उस समय विश्वभर में हर रोज़ एक करोड़ डॉलर की ट्रांजैक्शन होती थी वहीं आज के समय में बिटकॉइन की 1 हफ्ते में 1 ट्रिलियन डॉलर की ट्रांजैक्शन हो रही हैं।

क्रिप्टोकरेंसी के क्या फायदे हैं ?
क्रिप्टोकरेन्सी की लोकप्रियता देखकर ऐसा प्रतीत होता है की इसके फायदे काफी ज्यादा होंगे। चलिए Cryptocurrency के फायदे जाने का प्रयास करते हैं। जैसा की आप जानते हैं क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल मनी या इलेक्ट्रॉनिक मनी के नाम से भी जाना जाता है। अतः इसमें धोखा-धड़ी होने की संभावना लगभग ना के बराबर हैं।

शेयर बाजार में रुझान रखने वाले लोगों के लिए क्रिप्टोकरेन्सी काफी बेहतर है क्योंकि वे इसे आसानी से निवेश कर पाने के साथ साथ अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं। धीरे धीरे विश्व के सभी देश Cryptocurrency को मान्यता देते जा रहे हैं ऐसे में जितना अधिक निवेश होगा उतना ही अधिक फायदा भी होगा।

ज्यादातर क्रिप्टोकरेंसी के वॉलेट भी उपलब्ध हैं, जिसकी वजह से ऑनलाइन खरीददारी या फिर पैसे के लेन-देन में काफी आसान हो गई है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सरकार के नियंत्रण में नहीं आती, जिसकी वजह से इसे नोटबंदी जैसी परेशानियों का सामना भी नहीं करना होगा।

एक साथ काफी पैसा एक देश से दूसरे देश में ट्रांसफर करने के लिए क्रिप्टोकरेन्सी सबसे बेहतरीन साधन है, इस पर किसी देश की सीमाएं लागू नहीं होती हैं। क्रिप्टोकरेंसी उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद है जो अपना पैसा छुपाकर रखते हैं, उनका पैसा यहां पूरी तरह से सुरक्षित रहता है क्योंकि यह एक डिजिटल मुद्रा है।


क्रिप्टो करेंसी के क्या नुकसान हैं ?
जैसे हर सिक्के के दो पहलू होते हैं ठीक उसी तरह क्रिप्टोकरेंसी के भी फायदे के साथ-साथ कुछ नुकसान भी हैं। हालांकि फायदे नुकसान की अपेक्षा कहीं अधिक हैं पर इसका मतलब ये नहीं कि उन्हें नज़रंदाज़ कर दिया जाय। क्रिप्टोकरेंसी का जो सबसे बड़ा फायदा है वही इसका सबसे बड़ा नुकसान भी है, कहने का अर्थ ये है की cryptocurrency सिर्फ डिजिटली उपलब्ध है, इसका मुद्रण नहीं होता है।

अगर आपकी डिजिटल वॉलेट आईडी खो जाती है तो इसे दुबारा पाना मुमकिन नहीं है। ऐसे में आपके जो भी पैसे वॉलेट में जमा थे वो हमेशा के लिए खो जायेंगे। इसके अलावा इस पर कोई सरकारी नियंत्रण या दबाव नहीं होता इसलिए इसमें भारी उछाल के साथ-साथ ही भारी गिरावट भी देखने को मिलती है।

इसके अलावा इसका दुरुपयोग हथियारों की खरीद-फरोख्त, ड्रग्स की सप्लाई और कालाबाजारी इत्यादि में भी आसानी से किया जा सकता है। चूंकि इसका इस्तेमाल दो लोगों के बीच ही किया जाता है, जिससे ऐसी चीज़ों को पकड़ पाना या रोक पाना भी काफी मुश्किल है।

इसके साथ ही इसके हैक होने की भी संभावनाएं बनी रहती हैं, हालांकि यह काफी कठिन है लेकिन नामुमकिन तो नहीं। इसके अलावा गलती से किया गया कोई भी ट्रांजैक्शन आप वापिस नहीं ले सकते हैं।


बिटकॉइन (Bitcoin) 

क्रिप्टोकरेंसी की बात हो और बिटकॉइन की चर्चा न हो ऐसा मुमकिन नहीं, कई तो ऐसे लोग हैं जिन्हें बिटकॉइन के अलावा किसी और क्रिप्टोकरेंसी का नाम भी नहीं पता होगा। वर्तमान में एक बिटकॉइन की कीमत 45 हज़ार यूएस डॉलर (33 लाख भारतीय रुपए) से अधिक है। यह विश्व की सबसे चर्चित और भरोसेमंद क्रिप्टोकरेंसी है। इसकी शुरुआत 2009 में हुई थी, उस वक्त इसका मूल्य एक डॉलर प्रति बिटकॉइन था। हालांकि यहां तक पहुंचने के लिए बिटकॉइन को काफी उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा।

इथीरियम (Ethereum) –

बिटकॉइन के बाद इथीरियम दूसरी सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी है। वर्तमान में इसकी कीमत 3 हज़ार यूएस डॉलर (2 लाख 35 हज़ार रुपए) के करीब है। इसके फाउंडर का नाम वितालिक ब्युटेरिन है। इस क्रिप्टोकरेंसी के टोकन को ईथर भी कहा जाता है। ये अपने यूज़र्स को डिजिटल टोकन बनाने में मदद करता है, जिसके जरिए इसे करेंसी की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

लाइटकॉइन Litecoin (LTC) –

इसकी ज्यादातर खूबियां बिटकॉइन से मिलती हैं। इसकी ब्लॉक जनरेशन बिटकॉइन के मुकाबले चार गुना तक कम है, जिसकी वजह से इसमें ट्रांजैक्शन आसानी से और जल्दी हो जाते हैं। इसमें माइनिंग के लिए स्क्रिप्ट अल्गोरिथम का इस्तेमाल होता है।

डॉजकॉइन Dogecoin (Doge) –

इसे शुरुआती दौर में बिटकॉइन के मज़ाक के तौर पर बनाया गया था, जिसमें बिटकॉइन की तुलना कुत्ते से की गई थी, हालांकि बाद में इसने एक प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी का रूप ले लिया। आज डॉजकॉइन काफी तेज़ी से उभरता हुआ क्रिप्टोकरेंसी है। इसके फाउंडर का नाम बिली मार्कस है। लाइटकॉइन की तरह इसमें भी माइनिंग के लिए स्क्रिप्ट अल्गोरिथम का इस्तेमाल होता है। इसमें माइनिंग की प्रक्रिया दूसरे क्रिप्टोकरेंसी के मुकाबले अधिक तेजी से होती है।

डैश Dash –

इसे पहले XCoin और Darkcoin के नाम से भी जाना जाता था। Dash शब्द डिजिटल और कैश का मिला हुआ रूप है। इसमें बिटकॉइन की तुलना में कई ज्यादा फीचर्स मौजूद हैं, जैसे इनस्टैंट सेंड और प्राइवेट सेंड। इनस्टैंट सेंड में ट्रांजैक्शन आसानी से और जल्दी हो जाते हैं। वहीं प्राइवेट सेंड में यूज़र की प्राइवेसी को महत्व दिया जाता है। इसके अल्गोरिथम की वजह से ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी करेंसी को खुद भी माइन कर सकते हैं।

रिपल (Ripple) –

यह एक काफी लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी है, यह खुद की क्रिप्टोकरेंसी से चलता है। इसे 2012 में लांच किया गया था। इसकी ओवरआल मार्केट कैप करीब 10 बिलियन से भी अधिक है।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी के लिए संभावनाएं

भारत में करीब 15 क्रिप्टो एक्सचेंज काम कर रहे हैं जिनका दैनिक कारोबार 1500 करोड़ रुपए के करीब है। दुनियाभर में की जा रही क्रिप्टोकरेंसी की मार्केट कैप 1635 अरब डॉलर से अधिक है। वहीं अकेले बिटकॉइन का ही मार्केट कैप 50 लाख करोड़ से अधिक है। जो कि भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस से तीन गुना है।

इस बात से हम अंदाजा लगा सकते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी का मार्केट कितना बड़ा है। भारत में क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट करने वालों की संख्या 1 करोड़ के आस-पास है, हालांकि यह संख्या अब लगातार बढ़ रही है। शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करने का एक समय सुबह 9:00 बजे से शाम 3:30 बजे तक ही निर्धारित है, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी के मार्केट में ऐसी कोई पाबंदी नहीं हैं। ये क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज मार्केट 24 घंटे खुले रहते हैं और इनमें साप्ताहिक अवकाश भी नहीं होते। आप दिन या रात किसी भी वक्त क्रिप्टो करेंसी में ट्रेडिंग कर सकते हैं।

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